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आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्‍थान

(केन्‍द्र प्रवर्तित योजनांतर्गत दिनांक 02/09/2004 को प्रारंभ)

भारत सरकार की प्रथम पंचवर्षीय योजना निर्माण के समय अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, इनके रीति-रिवाज, रहन-सहन तथा अन्‍य सांस्‍कृतिक व अनुसंधानिक तथ्‍यों के अभाव में इन वर्गो के विकास हेतु योजना बनाने में कठिनाई महसूस हुई थी। इसे ध्‍यान में रखकर केन्‍द्र सरकार ने 1954 में पुराने मध्‍य प्रदेश, उडीसा, बिहार एवं पं. बंगाल राज्‍य सरकारों को केंद्र प्रवर्तीत योजना अंतर्गत आदिमजाति अनुसंधान संस्‍थान स्‍थापित करने के निर्देश दिये थे।

मध्‍यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत 01 नवम्‍बर,2000 को छत्‍तीसगढ़ राज्‍य अस्तिव में आया। 2011 जनगणना के अनुसार छत्‍तीसगढ़ राज्‍य में अनुसूचित जनजाति जनसंख्‍या का प्रतिशत 30.62 है। राज्‍य में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या को दृष्टि रखते हुए भारत सरकार जनजातिय कार्य मंत्रालय के अनुसंशा अनुसार देश के 15वें आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्‍थान का 02 सितम्‍बर, 2004 को राज्‍य शासन द्वारा केन्‍द्र प्रवर्तित योजना अंतर्गत गठन किया गया।

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  • राज्‍य की अनुसूचित जनजातियों संबंधी आधारभूत सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्‍कृतिक अध्‍ययन एवं सर्वेक्षण करना।
  • अनुसूचित जनजातियों में व्‍याप्‍त समस्‍याओं का अध्‍ययन कर इनके निराकरण हेतु शासन को सुझाव देना।
  • अनुसूचित जनजातियों के विकास हेतु शासन द्वारा संचा‍लित योजनाओं का मूल्‍यांकन करना।
  • अनुसूचित जनजातियों की समस्‍याओं के निराकरण हेतु देश के प्रमुख विषय-विशेषज्ञों को आमंत्रि‍त कर राष्‍ट्रीय स्‍तर की कार्यशाला एवं संगोष्ठियों का आयोजन करना।

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  • राज्य की विशेष पिछड़ी जनजाति "कमार", "बैगा", "अबुझमाड़िया" जनजाति का आधारभूत सर्वेक्षण कार्य| [ वर्ष : 2016-17 ]
  • राज्य की विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर जनजाति का आधारभूत सर्वेक्षण कार्य| [ वर्ष : 2016-17 ]
  • भुंजिया विकास अभिकरण क्षेत्र के बाहर गरियाबंद, धमतरी एवं महासमुंद जिले में निवासरत भुंजिया परिवारों का सर्वेक्षण| [ वर्ष : 2016-17 ]

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  • संस्थान की संभागीय क्षेत्रीय इकाइयों बस्तर , सरगुजा एवं बिलासपुर द्वारा विधिक परामर्श सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर सम्बंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया| [ वर्ष : 2017-18 ]
  • बस्तर, नारायणपुर एवं कोंडागांव जिले में मात्रात्मक वर्तनी त्रुटि सुधार आदेश, वन अधिकारी अधिनियम के प्रावधान एवं राष्ट्रिय पोषण एवं स्वच्छता सम्बन्धी प्रशिक्षण सरगुजा संभाग में पंचायत प्रिनिधियों का सम्मलेन आयोजित किया गया| [ वर्ष : 2018-19 ]
  • नारायणपुर एवं दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय माह जुलाई में जाती प्रमाण-पत्र सरलीकरण एवं वन अधिकारी मान्यता पत्र अधिनियम सम्बन्धी प्रशिक्षण आयोजित किया गया|
    [ वर्ष : 2019-20 ]

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छत्तीसगढ़ में विशेष पिछड़ी जनजातियों की स्थिति


  • बैगा छत्तीसगढ़ के पांच जिलों के 10 ब्लॉकों में बैगा मौजूद हैं जिनकी आबादी 87,621 है , (ज्यादातर 301 ग्रा।प. / 524 गांवों में)। कबीरधाम के बोडला (30.2%) और पंडरिया (19.5%) ब्लॉक में इनकी प्रमुखता देखी जा सकती है।
  • पहाड़ी कोरवा उत्तरी छत्तीसगढ़ में चार जिलों के 16 ब्लॉकों में फैले हुये है। मुख्यतः इनकी आबादी जशपुर के बागीचा ब्लॉक में है, उसके बाद बलरामपुर के शंकरगढ़ ब्लॉक में 48% जनजाति है।
  • बिरहोर जनजाति राज्य की आदिवासी आबादी का 1.9% है। यह पी.व्ही.टी.जी. जनजातीयों में सबसे छोटा समूह है और 4 जिलों के 16 ब्लॉकों में पाया जाता है। मुख्यतः आबादी धरमजयगढ़, पोड़ी उपरोड़ा और पाली में है, कोरबा और रायगढ़ जिलों में उनकी आधी आबादी है|
  • कमार पूर्वी सीमा की ओर 6 जिलों के 13 ब्लॉकों में केंद्रित है। उनमें से 60% से अधिक गरियाबंद जिले के गरियाबंद, छुरा और मैनपुर ब्लॉक में पाए जा सकते हैं।
  • अबुझमाड़िया दक्षिणी छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिले के नारायणपुर और ओरछा ब्लॉक में केंद्रित हैं। इनकी 90% आबादी ओरछा ब्लॉक में हैं।
  • पी.व्ही.टी.जी. की कई आबादी 5 ब्लॉक पोड़ी उपरोड़ा, कोरबा, कोटा, बागीचा और कुनकुरी में है, ज्यादातर पहाड़ी कोरवा और बिरहोर के बीच यह परस्पर-व्यापक पायी जाती है

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