हिन्दी | English
trti.cg@nic.in 0771-2960530          

छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियां

" अबुझमाड़िया "

अबुझमाड़िया जनजाति नारायणपुर, दंतेवाड़ा एवं बीजापुर जिले के अबुझमाड़ क्षेत्र में निवासरत हैं। ओरछा को अबुझमाड़ का प्रवेश द्वार कहा जा सकता है। इस जनजाति की कुल जनसंख्या सर्वेक्षण 2002 के अनुसार 19401 थी। वर्तमान में इनकी जनसंख्या बढ़कर 22 हजार से अधिक हो गई है।

अबुझमाड़िया जनजाति के उत्पत्ति के संबंध में कोई ऐतिहासिक अभिलेख नहीं है। किवदंतियों के आधार पर माड़िया गोंड़ जाति के प्रेमी युगल सामाजिक डर से भागकर इस दुर्गम क्षेत्र में आये और विवाह कर वहीं बस गये। इन्हीं के वंशज अबुझमाड़ क्षेत्र में रहने के कारण अबुझमाड़िया कहलाये। सामान्य रूप से अबुझमाड़ क्षेत्र में निवास करने वाले माड़िया गोंड़ को अबुझमाड़िया कहा जाता है।

अबुझमाड़िया जनजाति का गाँव मुख्यतः पहाड़ियों की तलहटी या घाटियों में बसा रहता है। पंदा कृषि (स्थानांतरित कृषि) पर पूर्णतया निर्भर रहने वाले अबुझमाड़िया लोगों का निवास अस्थाई होता था। पेंदा कृषि हेतु कृषि स्थान को ‘कघई‘ कहा जाता है। जब ‘कघई‘ के चारों ओर के वृक्ष व झाडियों का उपयोग हो जाता थाा तो वो पुनः नई ‘कघई‘ का चयन कर ग्राम बसाते थे। वर्तमान में शासन द्वारा पेंदा कृषि पर प्रतिबंध की वजह से स्थाई ग्राम बसने लगे हैं।

अधिक जानें


" कमार "

कमार जनजाति गरियाबंद जिले की गरियाबंद, छूरा, मैनपुर तथा धमतरी जिले के नगरी तथा मगरलोड विकासखण्ड में मुख्यतः निवासरत हैं। महासमुंद जिले के महासमुंद एवं बागबाहरा विकासखण्ड में भी इनके कुछ परिवार निवासरत हैं। इस जनजाति को भारत सरकार द्वारा ‘‘विशेष पिछड़ी जनजाति‘‘ का दर्जा दिया गया है। 2011 की जनगणना अनुसार राज्य में इनकी जनसंख्या 26530 दर्शित है। इनमें 13070 पुरूष एवं 13460 स्त्रियाँ हैं।

कमार जनजाति अपनी उत्पत्ति मैनपुर विकासखण्ड के देवडोंगर ग्राम से बताते हैं। इनका सबसे बड़ा देवता ‘‘वामन देव‘‘ आज भी देवडोंगर की ‘‘वामन डोंगरी‘‘ में स्थापित है।

इस जनजाति के लोगों के मकान घास फूस या मिट्टी के बने होते हैं। मकान में प्रवेश हेतु एक दरवाजा होता है, जिसमें लकड़ी या बाँस का किवाड़ होता है। छप्पर घास फूस या खपरैल की होती है। दीवारों पर सफेद मिट्टी की पुताई करते हैं। फर्श मिट्टी का होता है, जिसे स्त्रियाँ गोबर से लीपती हैं। घरेलू वस्तुओं में मुख्यतः चक्की, अनाज रखने की कोठी, बांस की टोकनी, सूपा, चटाई, मिट्टी के बर्तन, खाट, मूसल बांस बर्तन बनाने के औजार, ओढ़ने बिछाने तथा पहनने के कपड़े, खेती के औजार जैसे - गैती, फावड़ा, हंसिया, कुल्हाड़ी आदि। इस जनजाति के लोग शिकार करते थे, तीर-धनुष तथा मछली पकड़ने का जाल प्रायः घरों में पाया जाता है। पुरूष व महिलाएँ प्रतिदिन दातौन से दाँतों की सफाई कर स्नान करते हैं।

अधिक जानें


" बैगा "

बैगा छत्तीसगढ़ की एक विशेष पिछड़ी जनजाति है। छत्तीसगढ़ में उनकी जनसंख्या जनगणना 2011 में 89744 दशाई गई है। राज्य में बैगा जनजाति के लोग मुख्यतः कवर्धा और बिलासपुर जिले में पाये जाते हैं। मध्य प्रदेश के डिंडौरी, मंडला, जबलपुर, शहडोल जिले में इनकी मुख्य जनसंख्या निवासरत है।

बैगा जनजाति के उत्पत्ति के संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। रसेल, ग्रियर्सन आदि में इन्हें भूमिया, भूईया का एक अलग हुआ समूह माना जाता है। किवदंतियों के अनुसार ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना की तब दो व्यक्ति उत्पन्न किये। एक को ब्रह्मा जी ने ‘‘नागर‘‘ (हल) प्रदान किया। वह ‘‘नागर‘‘ लेकर खेती करने लगा तथा गोंड कहलाया। दूसरे को ब्रह्माजी ने ‘‘टंगिया‘‘ (कुल्हाड़ी) दिया। वह कुल्हाड़ी लेकर जंगल काटने चला गया, चूंकि उस समय वस्त्र नहीं था, अतः यह नंगा बैगा कहलाया। बैगा जनजाति के लोग इन्हीं को अपना पूर्वज मानते हैं।

बैगा जनजाति के लोग पहाड़ी व जंगली क्षेत्र के दुर्गम स्थानों में गोंड, भूमिया आदि के साथ निवास करते हैं। इनके घर मिट्टी के होते हैं, जिस पर घास फूस या खपरैल की छप्पर होती है। दीवाल की पुताई सफेद या पीली मिट्टी से करते हैं। घर की फर्श महिलाएं गोबर और मिट्टी से लीपती हैं। इनके घर में अनाज रखने की मिट्टी की कोठी, धान कूटने का ‘‘मूसल‘‘, ‘‘बाहना‘‘, अनाज पीसने का ‘‘जांता‘‘, बांस की टोकरी, सूपा, रसोई में मिट्टी, एलुमिनियम, पीतल के कुछ बर्तन, ओढ़ने बिछाने के कपड़े, तीर-धनुष, टंगिया, मछली पकड़ने की कुमनी, ढुट्टी, वाद्ययंत्र में ढोल, नगाड़ा, टिसकी आदि होते हैं।

अधिक जानें


" बिरहोर "

बिरहोर छत्तीसगढ़ की एक विशेष पिछड़ी जनजाति है। देश में इनकी अधिकांश जनसंख्या झारखंड राज्य में निवासरत है। वर्ष 2011 की जनगणना में छत्तीसगढ़ में इनकी जनसंख्या 3104 दर्शाई गई है। इनमें पुरूष 1526 एवं महिला 1578 थी। इस जनजाति के लोग छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, लैलूंगा, तमनार विकासखण्ड में, जशपुर जिले के बगीचा, कांसाबेल, दुलदुला, पत्थलगांव विकासखण्डों में, कोरबा जिले के कोरबा, पोड़ी उपरोड़ा, पाली विकासखण्ड तथा बिलासपुर जिले के कोटा व मस्तूरी विकासखण्ड में निवासरत हैं।

बिरहोर जनजाति के उत्पत्ति के संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इन्हें कोलारियन समूह की जनजाति माना जाता है। इनमें प्रचलित किवदंती के अनुसाार सूर्य के द्वारा सात भाई जमीन पर गिराये गये थे, जो खैरागढ़ (कैमूर पहाड़ी) से इस देश में आये। चार भाई पूर्व दिशा में चले गये और तीन भाई रायगढ़ जशपुर की पहाड़ी में रह गये। एक दिन वे तीनों भाई देश के राजा से युद्ध करने निकले तथा उनमें से एक भाई के सिर का कपड़ा पेड़ में अटग गया इसे अशुभ लक्षण मानकर वह जंगल में चला गया तथा जंगल की कटीली झाड़ियों को काटने लगा। बचे दो भाई राजा से युद्ध करने चले गये और उसे युद्ध में हरा दिया। जब वे वापस आ रहे थे, तो उन्होंने अपने भाई को जंगल में ‘‘चोप‘‘ (झाड़ी) काटते देखा वे उसे बिरहोर (जंगल का आदमी या चोप काटने वाला) कहकर पुकारने लगे। वह गर्व से कहा कि हाँ भाइयों मैं बिरहोर हूँ और वह व्यक्ति जंगल में ही रहने लगा। उनकी संताने भी बिरहोर कहलाने लगी। मुण्डारी भाषा में ‘‘बिर‘‘ अर्थात् जंगल अथवा झाड़ी एवं ‘‘होर‘‘ का अर्थ आदमी है। बिरहोर का अर्थ जंगल का आदमी या झाड़ी काटने वाला आदमी हो सकता है।

अधिक जानें


" पहाड़ी कोरवा "

छत्तीसगढ़ में विशेष पिछड़ी जनजाति जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर, तथा कोरबा जिले में निवासरत है। सर्वेक्षण वर्ष 2005-06 के अनुसार इनकी कुल जनसंख्या 34122 थी। वर्तमान में इनकी जनसंख्या बढ़कर लगभग 40 हजार से अधिक हो गई है। पहाड़ी कोरवा जनजाति की उत्पत्ति के संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। कालोनिल डाॅल्टन ने इन्हें कोलारियन समूह से निकली जाति माना है। किवदंतियों के आधार पर अपनी उत्पत्ति राम-सीता से मानते हैं। वनवास काल में राम-सीता व लक्ष्मण धान के एक खेत के पास से गुजर रहे थे। पशु-पक्षियों से फसल की सुरक्षा हेतु एक मानवाकार पुतले को धनुष-बाण पकड़ाकर खेत के मेढ़ में खड़ा कर दिया था। सीता जी के मन में कौतुहल करने की सूझी। उन्होंने राम से उस पुतले को जीवन प्रदान करने को कहा। राम ने पुतले को मनुष्य बना दिया यही पुतला कोरवा जनजाति का पूर्वज था। एक अन्य मान्यता के अनुसार शंकर जी ने सृष्टि का निर्माण किया। तत्पश्चात् उन्होंने सृष्टि में मनुष्य उत्पन्न करने का विचार लेकर रेतनपुर राज्य के काला और बाला पर्व से मिट्टी लेकर दो मनुष्य बनाये। काला पर्वत की मिट्टी से बने मानव का नाम कइला तथा बाला पर्वत की मिट्टी से बने हुये मानव का नाम घुमा हुआ। तत्पश्चात् शंकर जी ने दो नारी मूर्ति का निर्माण किया जिनका नाम सिद्धि तथा बुद्धि था। कइला ने सिद्धि के साथ विवाह किया, जिनसे तीन संतानें हुईं पहले पुत्र का नाम कोल, दूसरे पुत्र का नाम कोरवा तथा तीसरे पुत्र का नाम कोडाकू हुआ। कोरवा के भी दो पुत्र हुये। एक पुत्र पहाड़ में जाकर जंगलों को काटकर दहिया खेती करेन लगा, पहाड़ी कोरवा कहलाया। दूसरा पुत्र जंगल को साफ कर हल के द्वारा स्थाई कृषि करने लगा, डिहारी कोरवा कहलाया।

अधिक जानें


" भुंजिया "

भुंजिया जनजाति का संकेन्द्रण प्रमुख रूप से राज्य के गरियाबंद, धमतरी एवं महासमुंद जिले मे है। जनगणना 2011 अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य मे भुंजिया जनजाति की जनसंख्या 10603 है। इनमें स्त्री-पुरूष लिंगानुपात 1029 है। इनकी साक्षरता दर 50.93 प्रतिशत है जिसमे पुरूष साक्षरता 64.19 एवं स्त्री साक्षरता 38.04 प्रतिशत है।

भुंजिया जनजाति की चैखुटिया भुंजिया एवं चिंदा भुंजिया दो उपजातियां है। मान्यता अनुसार चैखुटिया भुंजिया जनजाति की उत्पत्ति हल्बा पुरूष एवं गोंड महिला के विवाह से माना जाता है वही रिज़ले ने चिंदा भुंजिया की उत्पत्ति बिंझवार एवं गोंड जनजाति से मानी है। अन्य अवधारणा अनुसार आग मे जलने के कारण इन्हें भुंजिया कहा जाने लगा।

भुंजिया जनजाति ग्रामों मे क्षेत्र की गोंड, कमार आदि समुदायों के साथ निवासरत है। इनके घर सामान्यतः 02-03 कमरों के होते है। घर प्रायः मिट्टी के बने होते है। फर्श की लिपाई गोबर मिट्टी से प्रतिदिन की जाती है। भुंजिया जनजाति अपने आवास की साफ-सफाई एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते है। चैखुटिया भुंजिया लोग अपने घरों में पृथक से रांधा घर बनाते है जिसकी छत प्रायः घास-फूंस की होती है व दिवारे क्षेत्र मे पायी जाने वाली विशिष्ट प्रकार की लाल मिट्टी से पुताई की हुई होती है। जो पृथक से दिखाई पड़ती है। इनमे रांधा घर को ’’लाल बंगला’’ कहा जाता है। लाल बंगला के संबंध में माना जाता है कि यहां इनका देव स्थान होता है। इस रांधा घर को गोत्रज सदस्य के अतिरिक्त अन्य कोई स्पर्श नही कर सकते है।

अधिक जानें


" गोंड़ "

गोंड़ शब्द की व्युत्पत्ति तेलगु (द्रविड़) भाषा के कोंड़ से मानी जाती है। अर्थात् कोंड़ (पर्वत) में रहने वाले लोग गोंड़ कहलाये। मध्यप्रदेश के गोंडवाना क्षेत्र के गोंड जाति का शासन एवं आधिपत्य था। रानी दुर्गावती इस जनजाति की वीर महिला शासक थी।

आदिम कृषि, शिकार, जंगली ऊपज संग्रहण इनकी आजीविका का मुख्य आधार था। अबुझमाड़िया, दंडामी मारिया आदि उपजातियां पेंदा कृषि करते थे। अन्य उपजातियां स्थायी कृषि करते हैं।

मामा या बुआ की लड़की के साथ विवाह को प्राथमिकता देते हैं। कन्या के पिता को खर्ची या सुक के रूप में अनाज दाल, तेल, गुड़, हल्दी, वधु के कपड़े तथा नगद रूपये दिये जाते हैं। बूढ़ादेव, ठाकुर देव, बूढ़ीमाई, बड़ापेन, आंगादेव, दन्तेवश्वरी माई आदि इनके प्रमुख देवी-देवता हैं। हरेली, पोला, नवाखानी, दशहरा, दीवाली, होली आदि प्रमुख त्यौहार मनाते हैं।

बस्तर, दंतेवाड़ा में काकसार नृत्य, सरगुजा, कवर्धा, बिलासपुर, रायपुर में करमा नृत्य, महिलाएं सुवा नृत्य करती हैं। लोक गीतों में करमा, ददरिया, सुवा, फाग, विवाह गीत आदि प्रमुख है। इस जनजाति की अपनी स्वयं की बोली गोंड़ी या कोयतुर पायी जाती है।


अनंतिम आंकड़े

क्र. पी.टी.जी. का
नाम
कोड जिला कोड ब्लॉक कोड कुल ग्रा. पं /
न. प
कुल सर्वेक्षित
ग्रा / नगर
कुल परिवार पुरुष महिला कुल जनसंख्या
1. अबूझमाड़िया 1 नारायणपुर 17 नारायणपुर 107 64 13 154 344 382 726
2. अबूझमाड़िया 1 नारायणपुर 17 ओरछा 108 39 236 4631 11084 11499 22583
योग 39 236 4631 11084 11499 22583
1. बैगा 2 बिलासपुर 8 गौरेल्ला-2 (पेंडरा र) 35 50 17 2095 4113 3893 8006
2. बैगा 2 बिलासपुर 8 कोटा 36 101 32 1520 2646 2522 5168
3. बैगा 2 बिलासपुर 8 तखतपुर 39 117 2 60 110 137 247
4. बैगा 2 कबीरधाम 9 बोड़ला 73 142 184 6635 13976 13459 27435
5. बैगा 2 कबीरधाम 9 पंडरिया 75 146 78 4625 8710 8534 17244
6. बैगा 2 कोरिया 2 भरतपुर 95 64 84 5155 7963 8030 15993
7. बैगा 2 कोरिया 2 खडगावाना 96 64 24 355 634 579 1213
8. बैगा 2 कोरिया 8 मनेन्द्रगढ़ 97 58 23 437 795 741 1536
9. बैगा 2 मुंगेली 22 लोरमी 104 134 41 2358 4257 4114 8371
10. बैगा 2 राजनांदगांव 10 छुईखदान 123 107 39 1348 2282 2270 4552
योग 983 524 24588 45486 44279 89765
1. बिरहोर 3 बिलासपुर 8 कोटा 36 101 04 104 163 174 337
2. बिरहोर 3 बिलासपुर 8 मस्तूरी 38 126 02 39 57 66 123
3. बिरहोर 3 जशपुर 4 बगीचा 65 86 4 58 99 83 182
4. बिरहोर 3 जशपुर 4 डुलडुला 66 30 1 16 29 27 56
5. बिरहोर 3 जशपुर 4 कंसाबेल 68 37 4 28 49 53 102
6. बिरहोर 3 जशपुर 4 कुनकुरी 69 52 1 25 36 37 73
7. बिरहोर 3 जशपुर 4 पत्थलगाव 71 83 2 36 57 57 114
8. बिरहोर 3 कोरबा 6 करतला 89 73 3 13 21 20 41
9. बिरहोर 3 कोरबा 6 कोरबा 91 72 9 145 226 220 446
10. बिरहोर 3 कोरबा 6 पाली 92 91 11 160 241 258 499
11. बिरहोर 3 कोरबा 6 पोडी उपरोडा 93 100 12 188 284 275 559
12. बिरहोर 3 रायगढ 5 धरमजैगढ़ 110 123 17 219 333 350 683
13. बिरहोर 3 रायगढ 5 घरघोडा 111 42 2 13 30 22 52
14. बिरहोर 3 रायगढ 5 लैलुंगा 113 73 3 23 36 47 83
15. बिरहोर 3 रायगढ 5 तमनार 117 61 3 49 64 78 142
योग 1150 78 1116 1725 1767 3492
1. कमार 4 बलौदाबाजार 20 कसडोल 9 110 2 40 79 80 159
2. कमार 4 धमतरी 14 धमतरी 44 90 5 20 41 45 86
3. कमार 4 धमतरी 14 मगरलोड 46 64 26 448 809 827 1636
4. कमार 4 धमतरी 14 नगरी 47 99 88 1243 2330 2407 4737
5. कमार 4 गरियाबंद 21 छूरा 51 74 59 1092 2087 1995 4082
6. कमार 4 गरियाबंद 21 फिंगेश्वर 53 72 18 205 361 352 713
7. कमार 4 गरियाबंद 21 गरियाबंद 54 59 71 2005 3477 3517 6994
8. कमार 4 गरियाबंद 21 मैनपुर 55 73 51 1437 2282 2235 4523
9. कमार 4 कांकेर 15 नरहरपुर 83 66 13 79 143 151 294
10. कमार 4 कोण्डागांव 25 बडेराजपुर 84 42 1 10 20 17 37
11. कमार 4 महासमुंद 13 बागबाहरा 99 110 32 390 687 703 1390
12. कमार 4 महासमुंद 13 महासमुन्द 101 104 41 461 827 864 1691
13. कमार 4 महासमुंद 13 पिथोरा 102 123 2 44 85 82 166
योग 1086 409 7474 13234 13275 26509
1. पहाड़ी कोरवा 5 बलरामपुर 27 बलरामपुर 12 66 9 164 351 347 698
2. पहाड़ी कोरवा 5 बलरामपुर 27 कुसमी 13 68 24 751 1681 1629 3310
3. पहाड़ी कोरवा 5 बलरामपुर 27 राजपुर 14 62 43 1529 2972 2931 5903
4. पहाड़ी कोरवा 5 बलरामपुर 27 शंकरगढ़ 16 50 48 1347 2886 2836 5722
5. पहाड़ी कोरवा 5 जशपुर 4 बगीचा 65 86 81 3896 7165 7042 14207
6. पहाड़ी कोरवा 5 जशपुर 4 कुनकुरी 69 52 1 9 16 16 32
7. पहाड़ी कोरवा 5 जशपुर 4 मनोरा 70 40 12 238 494 523 1017
8. पहाड़ी कोरवा 5 कोरबा 6 कोरबा 91 72 23 609 1145 1200 2345
9. पहाड़ी कोरवा 5 कोरबा 6 पोडी उपरोडा 93 100 4 33 67 59 126
10. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 अंबिकापुर 140 86 11 298 586 568 1154
11. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 बतौली 141 40 16 409 834 811 1645
12. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 लखानपुर 142 70 8 185 370 367 737
13. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 लुन्ड्रा 143 70 62 1053 2193 2087 4280
14. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 मैनपाट 111 41 16 354 731 736 1467
15. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 सीतापुर 145 41 9 190 358 347 705
16. पहाड़ी कोरवा 5 सरगुजा 3 उदयपूर 146 53 5 170 320 313 633
योग 998 372 11235 22169 21812 43981
महायोग 4320 1632 49198 94042 93014 187056